Vitamin C: अनदेखी कमी जो शरीर को अंदर से तोड़ती है
मेराज उद्दीन सिद्दीकी
| स्वास्थ्य डेस्क |
- बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान और बढ़ते तनाव के बीच आम लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता लगातार कमजोर हो रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बार-बार बीमार पड़ना, थकान और मसूड़ों की शिकायतों के पीछे कई बार किसी बड़ी बीमारी से अधिक Vitamin C की कमी जिम्मेदार होती है।
अक्सर Vitamin C को केवल सर्दी-जुकाम तक सीमित कर दिया जाता है, जबकि चिकित्सा विज्ञान बताता है कि यह विटामिन शरीर की सुरक्षा प्रणाली की रीढ़ है। चूंकि मानव शरीर Vitamin C स्वयं नहीं बना सकता, इसलिए इसकी नियमित आपूर्ति बेहद जरूरी मानी जाती है।
शरीर की सुरक्षा में Vitamin C की अहम भूमिका
Vitamin C, जिसे वैज्ञानिक भाषा में Ascorbic Acid कहा जाता है, एक जल में घुलनशील विटामिन है। यह शरीर में श्वेत रक्त कोशिकाओं को सक्रिय कर संक्रमण से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है। साथ ही यह Collagen के निर्माण में मदद करता है, जो त्वचा, हड्डियों, जोड़ों और रक्त वाहिकाओं की मजबूती के लिए आवश्यक है।
विशेषज्ञों के अनुसार Vitamin C आयरन के अवशोषण को भी बेहतर बनाता है, जिससे शाकाहारी लोगों में एनीमिया का खतरा कम हो सकता है।
डॉक्टर की राय: छोटी कमी, बड़ा असर
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एम. आर. खान कहते हैं,
“कई मरीज बार-बार सर्दी-जुकाम, मसूड़ों से खून या लगातार थकान की शिकायत लेकर आते हैं। जांच में Vitamin C की कमी सामने आती है। संतुलित आहार से इस कमी को आसानी से पूरा किया जा सकता है। बिना चिकित्सकीय सलाह के सप्लीमेंट लेना नुकसानदेह हो सकता है।”
कितनी मात्रा जरूरी, कितना है सुरक्षित
स्वास्थ्य मानकों के अनुसार:
वयस्क पुरुषों को प्रतिदिन लगभग 90 मिलीग्राम,
महिलाओं को लगभग 75 मिलीग्राम Vitamin C की आवश्यकता होती है।
गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और धूम्रपान करने वालों में इसकी जरूरत सामान्य से अधिक होती है।
कमी के संकेत जिन्हें नज़रअंदाज़ करना खतरनाक
Vitamin C की कमी धीरे-धीरे शरीर को कमजोर करती है। इसके सामान्य लक्षण हैं—
बार-बार संक्रमण, थकान, मसूड़ों से खून आना, त्वचा का रूखापन और घाव भरने में देरी।
लंबे समय तक कमी रहने पर गंभीर स्थिति में स्कर्वी जैसी बीमारी भी हो सकती है।
प्राकृतिक स्रोत: सबसे सुरक्षित इलाज
पोषण विशेषज्ञों के अनुसार Vitamin C की पूर्ति का सबसे भरोसेमंद तरीका प्राकृतिक आहार है। आंवला, अमरूद, संतरा, नींबू, कीवी, पपीता, ब्रोकली और टमाटर इसके प्रमुख स्रोत माने जाते हैं।
विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि Vitamin C गर्मी से नष्ट हो जाता है, इसलिए सब्जियों को अधिक पकाने से बचना चाहिए।
यूनानी चिकित्सा क्या कहती है
यूनानी चिकित्सा पद्धति में खट्टे फलों और प्राकृतिक रसों को मुक़व्वियत-ए-मुदाफ़अत यानी शरीर की रक्षा शक्ति बढ़ाने वाला माना गया है। यूनानी विशेषज्ञों के अनुसार, मौसम के अनुसार फल-सब्जियों का सेवन और संतुलित भोजन शरीर को अंदर से मजबूत बनाए रखता है।
सप्लीमेंट पर निर्भरता क्यों जोखिम भरी
चिकित्सकों का कहना है कि सामान्य हालात में संतुलित आहार से Vitamin C की जरूरत पूरी हो जाती है। अनावश्यक सप्लीमेंट लेने से पेट दर्द, गैस, दस्त और लंबे समय में किडनी संबंधी समस्याएँ हो सकती हैं।
निष्कर्ष: रोज़ का पोषण, दीर्घकालिक सुरक्षा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि Vitamin C कोई तात्कालिक इलाज नहीं, बल्कि रोज़मर्रा के आहार का अनिवार्य हिस्सा है। ताजे फल और सब्जियों को नियमित भोजन में शामिल कर इम्यूनिटी को मजबूत रखा जा सकता है और कई दीर्घकालिक बीमारियों से बचाव संभव है।



