भारत पर कितना है कर्ज? जानिए डॉलर में कुल कर्ज, GDP अनुपात और पूरा आर्थिक सच:
मेराज उद्दीन सिद्दीकी | आर्थिक डेस्क |
भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, लेकिन इसके साथ-साथ देश पर कर्ज (Debt) का आकार भी चर्चा का विषय बना रहता है। आम लोगों के मन में सवाल है कि भारत पर कुल कर्ज कितना है, यह GDP के मुकाबले कितना है और क्या यह चिंता का कारण है?
आइए, सरकारी और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के आंकड़ों के आधार पर पूरी स्थिति समझते हैं।
भारत का कुल बाहरी कर्ज (External Debt) – डॉलर में
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के अनुसार,
जून 2025 तक भारत का बाहरी कर्ज:
लगभग 747 अरब डॉलर (USD 747 Billion)
यह कर्ज भारत ने विदेशी सरकारों, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और विदेशी निवेशकों से लिया है।
External Debt का GDP के मुकाबले अनुपात: लगभग 18.9% – 19%
👉 विशेषज्ञों के अनुसार, यह अनुपात अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से संतुलित और नियंत्रित माना जाता है।
भारत का कुल सरकारी कर्ज (Total Government Debt)
भारत का कुल सरकारी कर्ज केवल विदेशी नहीं, बल्कि आंतरिक (Domestic) और बाहरी दोनों को मिलाकर देखा जाता है।
मार्च 2025 तक भारत का कुल सरकारी कर्ज:
लगभग ₹181–182 लाख करोड़
डॉलर में अनुमानित मूल्य:
लगभग 2.2 से 2.4 ट्रिलियन डॉलर (USD 2.2–2.4 Trillion)
(यह अनुमान औसत विनिमय दर के आधार पर है)
Debt to GDP Ratio: भारत की असली तस्वीर
Debt-to-GDP Ratio यह बताता है कि देश का कुल कर्ज उसकी अर्थव्यवस्था (GDP) के मुकाबले कितना है।
भारत का Debt-to-GDP अनुपात (2024–25):
कुल सरकारी कर्ज: लगभग 80% – 82% of GDP
बाहरी कर्ज: लगभग 19% of GDP
भारत का कर्ज: ऐतिहासिक ट्रेंड
वर्ष
1980
कर्ज / GDP (%)
~48%
1990
~69%
2000
~74%
2010
~66%
2019
~75%
2020 (कोरोना काल)
~89%
2022
~82%
2024–25
~81–82%
कोरोना महामारी के दौरान सरकारी खर्च बढ़ने से कर्ज अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचा, लेकिन उसके बाद आर्थिक सुधार और राजकोषीय नियंत्रण से स्थिति में सुधार आया।
क्या भारत का कर्ज खतरनाक स्तर पर है?
- अर्थशास्त्रियों के मुताबिक:
भारत का कर्ज अमेरिका, जापान, इटली और फ्रांस जैसे देशों से काफी कम है
जापान का Debt-to-GDP अनुपात 200% से भी अधिक है
भारत की अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है, जिससे कर्ज चुकाने की क्षमता बनी रहती है
👉 इसलिए मौजूदा स्थिति में भारत का कर्ज संभालने योग्य (Manageable) माना जाता है।
निष्कर्ष
भारत पर कर्ज जरूर है, लेकिन:
बाहरी कर्ज GDP के मुकाबले सीमित है
कुल सरकारी कर्ज महामारी के बाद स्थिर हुआ है
आर्थिक विकास की रफ्तार कर्ज के दबाव को संतुलित कर रही है
आर्थिक जानकार मानते हैं कि यदि विकास दर और राजकोषीय अनुशासन बना रहा, तो भारत की कर्ज स्थिति चिंता का विषय नहीं बनेगी।





One Comment
सुजीत द्विवेदी
Really it’s a grand information which should be known by each and every indian. …