भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर!
Credit: Reuters |Dharamraj Dhutia |
भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिससे चिंताएं बढ़ गई हैं। ग्रीनलैंड विवाद के कारण वैश्विक अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों द्वारा पैसा निकालने से रुपये पर दबाव है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने हाल के महीनों में स्थिर रुख अपनाया है और समय-समय पर हस्तक्षेप कर दबाव का कुछ हिस्सा सोखने का प्रयास किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 91.74 के स्तर को पार कर गया है, जो एक रिकॉर्ड निचला स्तर है। इस गिरावट के पीछे कई कारक हैं, जिनमें वैश्विक अनिश्चितता, बढ़ती मुद्रास्फीति और अमेरिकी डॉलर की मजबूती शामिल हैं।
रुपये की गिरावट की मुख्य वजहें हैं:
– *ग्लोबल अनिश्चितता*: अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच ट्रेड टेंशन बढ़ रही है, जिससे डॉलर इंडेक्स कमजोर हुआ।
– *फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर (FPI) के आउटफ्लो*: भारत से पैसा निकालने को भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है।
– *घरेलू इक्विटी मार्केट में कमजोरी*: घरेलू इक्विटी मार्केट में कमजोरी ने भी दबाव बढ़ाया है।
– *डॉलर की मजबूत मांग*: मेटल इंपोर्टर्स की तरफ से डॉलर की भारी डिमांड के चलते रुपया लगातार कमजोर हो रहा है।
– *रिस्क-ऑफ मूड*: ग्लोबल मार्केट में ग्रीनलैंड विवाद की वजह से बढ़ती अनिश्चितता के बीच लोग जोखिम से बच रहे हैं और पैसा बाहर जा रहा है।




