कैसे KGMU के न्यूरोसर्जन ने ‘फ्लोटिंग बुलेट’ तकनीक से बचाई मासूम की जान?
30 जनवरी 2026
सेहत | ब्यूरो मुल्कनामा डेली|
लखनऊ (उत्तर प्रदेश): चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में अक्सर ऐसे मामले सामने आते हैं जो इंसानी जज्बे और आधुनिक तकनीक के संगम की मिसाल बन जाते हैं। ऐसा ही एक चमत्कार उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में देखने को मिला है। यहाँ के न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने एक साढ़े तीन साल की मासूम बच्ची के मस्तिष्क से ‘तैरती हुई’ गोली (Floating Bullet) निकालकर उसे नई जिंदगी दी है।
क्या था पूरा मामला?
यह घटना लखनऊ के इंदिरानगर इलाके की है। 17 दिसंबर की शाम साढ़े तीन साल की मासूम लक्ष्मी अपनी छत पर खेल रही थी। तभी अचानक एक अज्ञात ‘स्ट्रे बुलेट’ (हवाई फायरिंग की भटकी हुई गोली) उसके सिर के ऊपरी हिस्से को चीरती हुई अंदर धंस गई। बच्ची लहूलुहान होकर गिर पड़ी। आनन-फानन में परिजन उसे पास के अस्पताल ले गए, जहाँ स्थिति गंभीर देखते हुए उसे तुरंत KGMU के ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया।
डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती: ‘तैरती हुई गोली’
डॉ. अंकुर बजाज और उनकी टीम ने जब बच्ची का सीटी स्कैन (CT Scan) कराया, तो परिणाम चौंकाने वाले थे। गोली मस्तिष्क के अंदर एक जगह स्थिर नहीं थी। वह दिमाग के तरल पदार्थ (CSF) के दबाव के कारण लगातार अपनी जगह बदल रही थी। चुनौती यह थी कि अगर डॉक्टर ऑपरेशन के दौरान मस्तिष्क के एक हिस्से को खोलते, तो गोली खिसक कर दूसरे हिस्से में जा सकती थी।
साढ़े चार घंटे का जटिल ऑपरेशन और 9 नीडल तकनीक
टीम ने 9 विशेष सुइयों (Needles) की मदद से पहले बुलेट की सटीक लोकेशन को ‘लॉक’ किया। इसके बाद साढ़े चार घंटे की जटिल सर्जरी के बाद अंततः उस जानलेवा बुलेट को बाहर निकाल लिया। सफल सर्जरी के बाद बच्ची अब पूरी तरह होश में है और स्वस्थ है।
डॉक्टर का बयान:
“यह हमारे लिए बेहद चुनौतीपूर्ण केस था क्योंकि बुलेट मस्तिष्क के भीतर स्थिर नहीं थी। हमने ‘मल्टीपल नीडल लोकलाइजेशन’ तकनीक का इस्तेमाल किया ताकि सर्जरी के दौरान बुलेट हिले नहीं।” — डॉ. अंकुर बजाज, न्यूरोसर्जरी विभाग, KGMU
Medical Miracle in Lucknow: कैसे KGMU के न्यूरोसर्जन ने ‘फ्लोटिंग बुलेट’ तकनीक से बचाई मासूम की जान?
- KGMU की यह सफलता न केवल लखनऊ बल्कि पूरे देश के चिकित्सा जगत के लिए गर्व का विषय है। यह ऑपरेशन साबित करता है कि सही तकनीक और कुशल नेतृत्व के साथ नामुमकिन को भी मुमकिन बनाया जा सकता है।




