सरकारी खरीद में एससी/एसटी उद्यमियों के लिए 4% अनिवार्य हिस्सा–जेम पोर्टल से सीधे मिलेंगे सरकारी आर्डर:
31 जनवरी 2026
आगरा | राजवीर सिंह कुश| प्रबन्धकीय संपादक|
केंद्र सरकार अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के उद्यमियों को व्यवसाय और उद्योग के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठा रही है। सरकारी नीतियों के तहत अब कुल सरकारी खरीद का कम से कम 4 प्रतिशत हिस्सा एससी/एसटी एमएसएमई इकाइयों से लेना अनिवार्य कर दिया गया है।
यह व्यवस्था जेम (Government e-Marketplace) पोर्टल के माध्यम से लागू की जा रही है, जिससे दलित उद्यमियों को सीधे सरकारी बाजार से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।
नेशनल एससी/एसटी हब इस पूरी प्रक्रिया में एससी/एसटी उद्यमियों को वित्तीय सहायता, तकनीकी सहयोग, क्षमता निर्माण और मार्केट लिंकिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
🔹 आगरा में जागरूकता कार्यक्रम, MSME मंत्रालय की ज्वाइंट सेक्रेटरी ने बताईं योजनाएं
आगरा स्थित सीएफटीआई में नेशनल एससी/एसटी हब द्वारा एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के उद्यमियों को भारत सरकार की नीतियों, योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय की ज्वाइंट सेक्रेटरी मर्सी ईपाओ ने कहा कि सरकार चाहती है कि एससी/एसटी वर्ग के युवा सिर्फ रोजगार खोजने वाले न रहें, बल्कि रोजगार देने वाले बनें।
उन्होंने नेशनल एससी/एसटी हब की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह मंच उद्यमियों को सरकारी खरीद, तकनीकी सहायता और बाजार से जोड़ने में सेतु का काम कर रहा है।
🔹 उद्यमियों की समस्याएं भी सामने आईं, बिजली कनेक्शन का मुद्दा उठा
कार्यक्रम के दौरान उद्यमियों ने जमीनी समस्याएं भी सामने रखीं। बहुजन सशक्तिकरण संघ के राष्ट्रीय महासचिव नेत्र पाल सिंह ने आगरा में नए दलित उद्यमियों को टोरंट पावर द्वारा 5 किलोवाट का विद्युत कनेक्शन न दिए जाने का मुद्दा उठाया।
उन्होंने कहा कि बिजली कनेक्शन न मिलने के कारण नए कारखाने स्थापित नहीं हो पा रहे हैं, जबकि राज्य और केंद्र सरकार युवाओं को उद्योग और व्यापार की ओर बढ़ाने के लिए विशेष योजनाएं चला रही हैं।
कार्यक्रम में 80 से अधिक एससी/एसटी उद्यमी, नवोदित उद्यमी और विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। प्रश्न-उत्तर सत्र में उद्यमियों की शंकाओं का समाधान किया गया और प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को उपयोगी और प्रेरणादायक बताया।
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यह जागरूकता कार्यक्रम एससी/एसटी वर्ग के उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें देश की औद्योगिक विकास प्रक्रिया से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ठोस पहल के रूप में सामने आया।




