एंटीबायोटिक क्या होती है? – सरल भाषा में जाने
डॉ. आरिफ सिद्दीकी एमडी (मेडिसिन)
एंटीबायोटिक (Antibiotic) ऐसी दवाइयाँ हैं जो बैक्टीरिया (जीवाणु) से होने वाले संक्रमण को खत्म करने या उनके बढ़ने को रोकने के लिए दी जाती हैं।
ध्यान रहे – एंटीबायोटिक वायरस पर काम नहीं करतीं। यानी सर्दी-जुकाम, फ्लू, डेंगू, चिकनगुनिया, कोविड जैसी वायरल बीमारियों में एंटीबायोटिक आमतौर पर फायदेमंद नहीं होतीं।
एंटीबायोटिक की खोज कैसे हुई?
1928 में वैज्ञानिक Alexander Fleming ने पेनिसिलिन की खोज की। यह दुनिया की पहली सफल एंटीबायोटिक थी। इस खोज ने चिकित्सा जगत में क्रांति ला दी और लाखों लोगों की जान बची।
एंटीबायोटिक कैसे काम करती है?
बैक्टीरिया हमारे शरीर में घुसकर तेजी से बढ़ते हैं। एंटीबायोटिक दो तरीकों से काम करती हैं:
- बैक्टीरिया को मार देती हैं (Bactericidal)
- उनकी बढ़त रोक देती हैं (Bacteriostatic)
- इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) संक्रमण को खत्म कर पाती है।
एंटीबायोटिक कितने प्रकार की होती हैं?
एंटीबायोटिक कई प्रकार की होती हैं। यहाँ आसान भाषा में प्रमुख प्रकार और उनके उपयोग बताए जा रहे हैं:
1. पेनिसिलिन समूह (Penicillin Group)
उदाहरण: Amoxicillin, Ampicillin
कब दी जाती है:
गले का संक्रमण
कान का संक्रमण
दांत का संक्रमण
त्वचा संक्रमण
यह सबसे पुरानी और सुरक्षित मानी जाने वाली एंटीबायोटिक है, लेकिन कुछ लोगों को इससे एलर्जी हो सकती है।
2. सेफालोस्पोरिन (Cephalosporins)
उदाहरण: Cefixime, Ceftriaxone
कब दी जाती है:
टाइफाइड
निमोनिया
यूरिन इन्फेक्शन (UTI)
गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण
यह पेनिसिलिन से मिलती-जुलती होती है लेकिन ज्यादा प्रभावी मानी जाती है।
3. मैक्रोलाइड (Macrolides)
उदाहरण: Azithromycin, Clarithromycin
कब दी जाती है:
गले और फेफड़ों का संक्रमण
निमोनिया
कुछ यौन संचारित रोग
Azithromycin काफी लोकप्रिय दवा है।
4. टेट्रासाइक्लिन (Tetracycline Group)
उदाहरण: Doxycycline
कब दी जाती है:
मुंहासे
मलेरिया की रोकथाम
कुछ विशेष संक्रमण
गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को सामान्यतः नहीं दी जाती।
5. फ्लूरोक्विनोलोन (Fluoroquinolones)
उदाहरण: Ciprofloxacin, Levofloxacin
कब दी जाती है:
गंभीर UTI
आंत का संक्रमण
हड्डी और जोड़ों का संक्रमण
यह शक्तिशाली दवाइयाँ हैं और डॉक्टर की सख्त सलाह पर ही लेनी चाहिए।
6. सल्फा दवाइयाँ (Sulfonamides)
उदाहरण: Cotrimoxazole
कब दी जाती है:
मूत्र संक्रमण
कुछ आंत संबंधी संक्रमण
एंटीबायोटिक कब लेनी चाहिए?
✔ जब डॉक्टर जांच के बाद कहें कि संक्रमण बैक्टीरिया से हुआ है
✔ जब बुखार कई दिन तक बना रहे और कारण बैक्टीरियल हो
✔ जब खून, पेशाब या बलगम की रिपोर्ट में बैक्टीरिया मिले
कब नहीं लेनी चाहिए?
- सामान्य सर्दी-जुकाम
- वायरल बुखार
- डेंगू, चिकनगुनिया
- कोविड-19 (जब तक डॉक्टर न कहें)
गलत तरीके से एंटीबायोटिक लेने से शरीर में एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस (दवा बेअसर हो जाना) की समस्या हो जाती है।
एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस क्या है?
जब हम बिना जरूरत या बीच में दवा छोड़ देते हैं, तो कुछ बैक्टीरिया बच जाते हैं और मजबूत हो जाते हैं।
आगे चलकर वही बैक्टीरिया सामान्य दवा से नहीं मरते।
World Health Organization के अनुसार, एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस दुनिया के लिए बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है।
एंटीबायोटिक के साइड इफेक्ट क्या हो सकते हैं?
हर दवा की तरह एंटीबायोटिक के भी कुछ दुष्प्रभाव हो सकते हैं:
सामान्य साइड इफेक्ट:
- उल्टी
- दस्त
- पेट दर्द
- गैस
- सिर दर्द
गंभीर साइड इफेक्ट:
- एलर्जी (त्वचा पर चकत्ते, सूजन)
- सांस लेने में दिक्कत
- लिवर या किडनी पर असर
- आंत में अच्छे बैक्टीरिया का नष्ट होना
यदि दवा लेने के बाद सांस फूलने लगे या शरीर सूज जाए तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
एंटीबायोटिक लेते समय किन बातों का ध्यान रखें?
डॉक्टर की सलाह के बिना न लें।
पूरा कोर्स खत्म करें, बीच में बंद न करें।
समय पर लें, डोज मिस न करें।
किसी और की बची हुई दवा न लें।
शराब के साथ कुछ एंटीबायोटिक नुकसान कर सकती हैं।
बच्चों और बुजुर्गों में एंटीबायोटिक
बच्चों में डोज वजन के अनुसार दी जाती है।
बुजुर्गों में किडनी की जांच के बाद दी जाती है।
गर्भवती महिला को विशेष सावधानी के साथ दी जाती है।
क्या एंटीबायोटिक बार-बार लेने से शरीर कमजोर हो जाता है?
सीधे तौर पर नहीं, लेकिन:
आंत के अच्छे बैक्टीरिया कम हो जाते हैं
रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है
दवा बेअसर हो सकती है
इसलिए अनावश्यक उपयोग से बचना चाहिए।
प्राकृतिक एंटीबायोटिक क्या होती हैं?
लहसुन, हल्दी, अदरक में कुछ प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, लेकिन ये गंभीर संक्रमण का इलाज नहीं कर सकतीं।
गंभीर संक्रमण में डॉक्टर की दवा ही जरूरी है।
एंटीबायोटिक चिकित्सा विज्ञान की महत्वपूर्ण खोज है जिसने करोड़ों लोगों की जान बचाई है। लेकिन इसका गलत उपयोग भविष्य में बड़ी समस्या बन सकता है।
याद रखें:
हर बुखार में एंटीबायोटिक जरूरी नहीं
डॉक्टर की सलाह सबसे जरूरी
पूरा कोर्स खत्म करना अनिवार्य
सही जानकारी और सावधानी से एंटीबायोटिक जीवन रक्षक बन सकती है, लेकिन लापरवाही से यह खतरनाक भी हो सकती है।
नोट: उपलब्ध जानकारी विशेषज्ञ चिकित्सक की जानकारी पर आधारित है। किसी भी प्रकार की दवा प्रयोग करने से पहले डॉक्टर से परामर्श करे। बिना परामर्श स्वय दवा लेना घातक हो सकता हैं।




