डीसीपी ग्रैंड एनुअल फ़ोटोग्राफ़ी एंड फ़िल्म फ़ेस्टिवल 2026 में बासिल हाशमी का परचम, फ़ूड कैटेगरी में प्रथम पुरस्कार:
Lucknow |12 January 2026 |Aamir Ali Bureau |
लखनऊ के युवा और प्रतिभाशाली फ़ोटोग्राफ़र बासिल हाशमी ने एक बार फिर अपनी रचनात्मक प्रतिभा और तकनीकी कौशल का लोहा मनवाते हुए राष्ट्रीय स्तर पर शहर का नाम रोशन किया है। उन्होंने डीसीपी (डिजिटल क्रिएटिव फ़ोटोग्राफ़ी) ग्रैंड एनुअल फ़ोटोग्राफ़ी एंड फ़िल्म फ़ेस्टिवल 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए फ़ूड फ़ोटोग्राफ़ी कैटेगरी में प्रथम पुरस्कार अपने नाम किया। इसके साथ ही उनकी दो फ़ोटोग्राफ़ को टॉप–250 चयनित कृतियों में स्थान मिला, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
यह प्रतिष्ठित फ़ेस्टिवल 9 से 11 जनवरी 2026 के बीच बॉम्बे आर्ट सोसाइटी, बांद्रा रिक्लेमेशन, मुंबई में आयोजित किया गया, जिसमें देश-विदेश से आए फ़ोटोग्राफ़रों, फ़िल्ममेकरों और विज़ुअल आर्टिस्ट्स ने भाग लिया। इस वर्ष फ़ेस्टिवल में 5,000 से अधिक प्रविष्टियाँ प्राप्त हुईं, जिनमें से बासिल हाशमी की कृतियों का चयन होना उनकी प्रतिभा की गहराई और अंतरराष्ट्रीय स्तर की गुणवत्ता को दर्शाता है।
लगातार तीसरे वर्ष मिली राष्ट्रीय मान्यता
बासिल हाशमी के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि यह डीसीपी ग्रैंड एनुअल फ़ेस्टिवल में उन्हें लगातार तीसरे वर्ष मिली मान्यता है। इससे पहले वर्ष 2024 में भी उन्हें मानद पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। लगातार वर्षों तक इस प्रतिष्ठित मंच पर चयनित होना यह साबित करता है कि बासिल की फ़ोटोग्राफ़ी केवल एक संयोग नहीं, बल्कि निरंतर अभ्यास, गहन अध्ययन और सशक्त दृष्टिकोण का परिणाम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी फ़ोटोग्राफ़र के लिए निरंतरता सबसे बड़ी चुनौती होती है, और बासिल हाशमी ने इस चुनौती को बखूबी पार किया है। उनकी तस्वीरों में विषय की गहराई, प्रकाश और रंगों का संतुलन तथा कहानी कहने की क्षमता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
फ़ूड फ़ोटोग्राफ़ी में अलग पहचान
इस वर्ष बासिल हाशमी को जो प्रथम पुरस्कार मिला है, वह फ़ूड फ़ोटोग्राफ़ी कैटेगरी में है। फ़ूड फ़ोटोग्राफ़ी को आज के दौर में सबसे चुनौतीपूर्ण और प्रतिस्पर्धी शैलियों में गिना जाता है, जहाँ तकनीकी कौशल के साथ-साथ प्रस्तुति और कल्पनाशीलता भी अहम भूमिका निभाती है।
बासिल की पुरस्कार-विजेता फ़ोटोग्राफ़ में भोजन को केवल एक वस्तु के रूप में नहीं, बल्कि एक संस्कृति, भावना और अनुभव के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यही कारण है कि जूरी ने उनकी तस्वीर को सर्वश्रेष्ठ मानते हुए प्रथम पुरस्कार से नवाज़ा।
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दिग्गज फ़ोटोग्राफ़रों के हाथों मिला सम्मान
पुरस्कार समारोह की गरिमा उस समय और बढ़ गई जब बासिल हाशमी को यह सम्मान पद्मश्री सुधाकर ओलवे और रोहितन मेहता जैसे प्रतिष्ठित और अनुभवी फ़ोटोग्राफ़रों के हाथों प्रदान किया गया। इन दिग्गजों से मिला सम्मान न केवल बासिल के लिए प्रेरणादायक है, बल्कि उनके भविष्य के करियर को भी एक नई दिशा देता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मंच और वरिष्ठ फ़ोटोग्राफ़रों से मिला आशीर्वाद युवा कलाकारों के आत्मविश्वास को कई गुना बढ़ा देता है।
लखनऊ के लिए गर्व का क्षण
बासिल हाशमी की यह सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि लखनऊ जैसे शहर के उभरते रचनात्मक माहौल को भी राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाती है। बीते कुछ वर्षों में लखनऊ से कई युवा कलाकारों ने फ़ोटोग्राफ़ी, फ़िल्म और डिजिटल आर्ट के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है, और बासिल हाशमी इस कड़ी का एक सशक्त नाम बनकर उभरे हैं।
शहर के कला प्रेमियों और युवा फ़ोटोग्राफ़रों के लिए उनकी यह उपलब्धि प्रेरणा का स्रोत बन रही है। इससे यह संदेश भी जाता है कि मेहनत, अनुशासन और रचनात्मक सोच के बल पर किसी भी शहर से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँचा जा सकता है।
समकालीन भारतीय फ़ोटोग्राफ़ी में मज़बूत पहचान
फ़ोटोग्राफ़ी के जानकारों का मानना है कि बासिल हाशमी की यह उपलब्धि उन्हें समकालीन भारतीय फ़ोटोग्राफ़ी के क्षेत्र में एक मज़बूत और प्रभावशाली पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम है। उनकी शैली में आधुनिक तकनीक के साथ-साथ भारतीय संवेदनाओं की झलक साफ़ दिखाई देती है, जो उन्हें अन्य फ़ोटोग्राफ़रों से अलग बनाती है।
आने वाले समय में बासिल हाशमी से और भी बड़े राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उत्कृष्ट कार्य की उम्मीद की जा रही है




