पुलिस फायरिंग, CO अनुज चौधरी पर FIR का आदेश, SP का इंकार और लगातार जजों के तबादले से गरमाया सम्भल !

सम्भल जामा मस्जिद विवाद के बीच पुलिस फायरिंग, FIR आदेश और बार-बार CJM के तबादले ने प्रशासन और न्यायपालिका के टकराव को उजागर कर दिया है।
एजेंसी| ओपिनियन डेस्क | Mulknama Daily|
23 जनवरी 2026
अपडेट:
संभल में जामा मस्जिद सर्वे का आदेश देने वाले जज आदित्य सिंह केवल तीन घंटे तक ही CJM पद पर रहे। उन्हें CJM पद से हटाकर पुनः सिविल जज (सीनियर डिविजन) बना दिया गया है। कौशाम्बी के CJM दीपक जायसवाल को संभल का नया CJM नियुक्त किया गया है।
गौरतलब है कि इससे पहले संभल के CJM विभांशु सुधीर को हटाया गया था। उन्होंने संभल हिंसा और पुलिस फायरिंग मामले में पूर्व CO अनुज चौधरी के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया था। उनके तबादले के बाद आदित्य सिंह को CJM बनाया गया था, जिन्होंने जामा मस्जिद सर्वे का आदेश दिया। अब नई तबादला सूची में एक बार फिर संभल के CJM को बदल दिया गया है।
आइए जानते हैं पूरा विवाद क्या है ?
सम्भल जामा मस्जिद विवाद अब केवल एक धार्मिक या स्थानीय कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रह गया है। पुलिस फायरिंग, FIR दर्ज करने के न्यायिक आदेश, पुलिस प्रशासन का इंकार और लगातार मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) का बदलना—इन तमाम घटनाओं ने उत्तर प्रदेश की न्यायिक स्वतंत्रता और प्रशासनिक दबाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विवाद की शुरुआत जामा मस्जिद से जुड़े दावों और प्रशासनिक हस्तक्षेप से हुई। हालात तनावपूर्ण हुए और इसी दौरान पुलिस द्वारा गोली चलाने की घटना सामने आई। इस फायरिंग को लेकर पूर्व CO अनुज चौधरी की भूमिका पर सवाल उठे और पीड़ित पक्ष ने न्यायालय का रुख किया।
मामले की सुनवाई के बाद तत्कालीन CJM विभांशु सुधीर ने CO अनुज चौधरी के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया। यह आदेश पुलिस की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया। हालांकि, इस आदेश के बावजूद संभल के SP ने FIR दर्ज करने से इंकार कर दिया, जिससे न्यायालय और पुलिस प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई।
इसके कुछ ही समय बाद CJM विभांशु सुधीर का तबादला कर दिया गया। उनकी जगह जज आदित्य सिंह को संभल का नया CJM बनाया गया। जज आदित्य सिंह ने संभल जामा मस्जिद के सर्वे का आदेश दिया था, जिसने विवाद को एक नया मोड़ दे दिया।
लेकिन यह स्थिति भी ज्यादा समय तक स्थिर नहीं रही। ताजा तबादला सूची में जज आदित्य सिंह को महज तीन घंटे के भीतर CJM पद से हटा दिया गया और उन्हें वापस सिविल जज (सीनियर डिविजन) बना दिया गया। अब कौशाम्बी के CJM दीपक जायसवाल को संभल का नया CJM नियुक्त किया गया है।
एक ही जिले में कम समय के भीतर तीन CJM का बदलना कई सवाल खड़े करता है। क्या यह केवल संयोग है या फिर संवेदनशील मामलों में न्यायिक अधिकारियों पर अप्रत्यक्ष दबाव का संकेत? कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे तबादले न्यायपालिका की स्वतंत्रता की भावना को कमजोर करते हैं।
सम्भल प्रकरण में पुलिस फायरिंग, FIR के आदेश की अवहेलना और जजों के बार-बार तबादले ने आम नागरिकों, खासकर अल्पसंख्यक समुदाय के बीच असुरक्षा और अविश्वास की भावना को और गहरा किया है। यह मामला अब कानून के राज और संवैधानिक मूल्यों की कसौटी बन चुका है।




