क्या चीन है चांदी की कीमतों में लगी आग का जिम्मेदार? जानें चौंकाने वाले तथ्य:
30 जनवरी 2026
मेराज उद्दीन सिद्दीकी| व्यापार डेस्क |
चांदी की कीमतों में पिछले एक साल में जबरदस्त उछाल देखा गया है, कीमतें लगभग तीन गुना हो गई हैं। जनवरी 2025 में औसत मूल्य लगभग ₹80,000 प्रति किलोग्राम था, जो जनवरी 2026 में ₹4,10,000 प्रति किलोग्राम के शिखर पर पहुंच गया है।
चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल: क्यों बेकाबू हो रहे हैं दाम? जानें 5 बड़े कारण:
भारतीय और वैश्विक बाजारों में चांदी की कीमतों ने हाल ही में पुराने सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। निवेशकों और आम जनता के मन में एक ही सवाल है—चांदी इतनी महंगी क्यों हो रही है? आइए जानते हैं इसके पीछे के प्रमुख राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कारण और भविष्य के लिए निवेश के उपाय।
अंतरराष्ट्रीय कारण (Global Factors)
चांदी की कीमतों में उछाल का सबसे बड़ा कारण इसकी औद्योगिक मांग (Industrial Demand) है।
– ग्रीन एनर्जी का बढ़ता असर: सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और 5G इंफ्रास्ट्रक्चर में चांदी का बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहा है।
– सप्लाई संकट: पिछले 5 वर्षों से वैश्विक खदानों से चांदी का उत्पादन मांग के मुकाबले काफी कम रहा है।
– डॉलर की कमजोरी: अमेरिकी डॉलर के मूल्य में उतार-चढ़ाव निवेशकों को चांदी जैसे सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की ओर खींच रहा हैं।
वैश्विक बाजार में चांदी की कीमतों के बेकाबू होने के पीछे चीन की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
1. चीन का ‘सिल्वर एक्सपोर्ट’ पर प्रतिबंध:
1 जनवरी 2026 से चीन ने चांदी के निर्यात (Export) के लिए कड़े लाइसेंस नियम लागू कर दिए हैं। दुनिया की 60-70% रिफाइंड चांदी की आपूर्ति करने वाला देश जब हाथ खींचता है, तो वैश्विक बाजार में कीमतों का बढ़ना तय है।
2. सोलर और टेक इंडस्ट्री में भारी खपत:
चीन दुनिया का सबसे बड़ा सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) निर्माता है। इन उद्योगों में चांदी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए चीन अब चांदी का स्टॉक जमा कर रहा है।
3. रणनीतिक संसाधन(Strategic Resource):
चीन अब चांदी को सिर्फ एक धातु नहीं बल्कि ‘रणनीतिक हथियार’ की तरह देख रहा है। सेमीकंडक्टर और AI चिप्स में इसके बढ़ते महत्व के कारण चीन इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने के बजाय अपने पास सुरक्षित रख रहा है।
2. राष्ट्रीय कारण (National Factors)
भारत में चांदी की बढ़ती कीमतों के पीछे घरेलू कारण भी अहम हैं:
– रुपये की गिरावट: डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपये ने चांदी के आयात (Import) को महंगा कर दिया है।
– इन्वेस्टमेंट डिमांड: भारत में सिल्वर ईटीएफ (ETF) और डिजिटल चांदी के प्रति बढ़ते रुझान ने बाजार में सप्लाई को और सीमित कर दिया है।
निवेशकों के लिए उपाय और सलाह
विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर पर जल्दबाजी में निवेश करने के बजाय समझदारी से कदम उठाना चाहिए:
– SIP का रास्ता अपनाएं: चांदी में एक साथ बड़ा पैसा लगाने के बजाय ‘सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान’ (SIP) के जरिए निवेश करें।
– गिरावट का इंतजार करें: जब भी कीमतों में 5-8% का ‘करेक्शन’ आए, तब खरीदारी करना फायदेमंद हो सकता है।
– डिजिटल सिल्वर और ETF: फिजिकल चांदी रखने के बजाय डिजिटल विकल्प चुनें, जहाँ मेकिंग चार्जेस और सुरक्षा का जोखिम नहीं होता।
याद रखे बाजार जोखिमों के अधीन है
चांदी की बढ़ती कीमतें वैश्विक अर्थव्यवस्था में आ रहे बदलावों का संकेत हैं। हालांकि मांग मजबूत है, लेकिन निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो का केवल 5-10% हिस्सा ही इसमें रखना चाहिए ताकि जोखिम संतुलित रहे।
अस्वीकरण (Disclaimer)
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