ट्रंप का ‘मिशन ईरान’: क्या खामेनेई के खिलाफ तख्तापलट की उलटी गिनती शुरू? अमेरिका के हमले की आशंका तेज
नई दिल्ली / तेहरान।
ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ कथित तौर से बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के बीच अमेरिका की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर अटकलें तेज हैं। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ईरान में सत्ता परिवर्तन की रणनीति पर काम कर रहा है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ईरान एक बार फिर गंभीर राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ कथित तौर से भड़के व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच अमेरिका और ईरान के रिश्तों में तनाव चरम पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर यह दावा किया जा रहा है कि उनका अगला बड़ा रणनीतिक लक्ष्य ईरान हो सकता है।
ईरान के कई बड़े शहरों में बीते कुछ दिनों से विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक राजधानी तेहरान सहित लगभग 30 प्रांतों और 100 से अधिक शहरों में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर नारेबाजी की है। कई जगहों पर हिंसा, आगजनी और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की खबरें सामने आई हैं।
प्रदर्शनकारियों में गुस्सा, हालात बेकाबू
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार प्रदर्शनकारियों में भारी गुस्सा है। दावा किया जा रहा है कि हालात को काबू में लाने के लिए सुरक्षा बलों को बल प्रयोग करना पड़ा, जिससे कई लोगों की मौत और सैकड़ों के घायल होने की खबरें हैं। हालांकि इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर रजा पहलवी के समर्थन में झंडे और पोस्टर भी देखे गए हैं। पहलवी ईरान के पूर्व शाह मोहम्मद रजा पहलवी के पुत्र हैं और लंबे समय से विदेश से इस्लामिक शासन के विरोध में बयान देते रहे हैं।
अमेरिका की सैन्य गतिविधियों से बढ़ी आशंका
इन घटनाओं के बीच अमेरिका की बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने अटकलों को और हवा दे दी है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान के आसपास अमेरिकी एयरबेस पर तैनाती बढ़ाई गई है और फारस की खाड़ी में अमेरिकी ड्रोन व एयरक्राफ्ट की गतिविधियां तेज हुई हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह सब ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों को भी इन घटनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान की स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है और यदि हालात बिगड़ते हैं तो “कमजोर कड़ी पर सख्त कार्रवाई” से इनकार नहीं किया जा सकता।
क्या तख्तापलट की तैयारी?
कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शन सत्ता परिवर्तन की किसी बड़ी योजना का पहला चरण हो सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान जैसे देश में बाहरी हस्तक्षेप के जरिए तख्तापलट आसान नहीं है और इसके गंभीर क्षेत्रीय व वैश्विक परिणाम हो सकते हैं।
इतिहास पर नजर डालें तो ईरान में पहले भी बड़े आंदोलनों के बाद सत्ता परिवर्तन हो चुका है। 1979 की इस्लामिक क्रांति में शाह शासन का अंत इसी तरह के व्यापक जन आंदोलन के बाद हुआ था। लेकिन मौजूदा हालात उस दौर से काफी अलग माने जा रहे हैं।
खामेनेई की सुरक्षा को लेकर दावे
इस बीच ऐसी खबरें भी सामने आई हैं कि संभावित हमले की आशंका के चलते ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है। हालांकि ईरानी सरकार या आधिकारिक सूत्रों की ओर से इस पर कोई पुष्टि नहीं की गई है।
विशेषज्ञों की राय
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी तरह की सीधी सैन्य कार्रवाई पूरे मध्य-पूर्व को अस्थिर कर सकती है। फिलहाल जो भी दावे सामने आ रहे हैं, वे अधिकतर अटकलों और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं।
⚠️ नोट / डिस्क्लेमर
यह समाचार विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स, विश्लेषणों और दावों पर आधारित है। इनमें से कई सूचनाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पाठकों से आग्रह है कि इसे अंतिम सत्य के रूप में न लें।




