केंद्रीय बजट 2026: विकास का रोडमैप या आम आदमी की अनदेखी?
सरकार के दावे, विपक्ष के सवाल और आम वर्ग का असंतोष !
मेराज उद्दीन सिद्दीकी
01 फरवरी 2026
लखनऊ/नई दिल्ली।
केंद्रीय बजट 2026 को लेकर देश की राजनीति, सामाजिक संगठनों और आम वर्ग में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। केंद्र सरकार इसे “विकसित भारत 2047” की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष, कर्मचारी, पेंशनर और व्यापारी वर्ग इसे आम आदमी की अपेक्षाओं से दूर मान रहे हैं। उत्तर प्रदेश इस बहस का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
उत्तर प्रदेश को बजट 2026 की बड़ी सौगातें
केंद्रीय बजट में उत्तर प्रदेश को इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, उद्योग और तकनीक से जुड़ी कई योजनाओं की घोषणा की गई है—
वाराणसी में शिप रिपेयर इकोसिस्टम और एकीकृत लॉजिस्टिक हब
वाराणसी–दिल्ली हाई स्पीड रेल कॉरिडोर
सभी जिलों में इमरजेंसी ट्रॉमा सेंटर
ग्रामीण महिलाओं के लिए ‘श्री मार्ट’
हर जनपद में कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास
कैंसर और डायबिटीज की दवाएं सस्ती
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नया AIIMS
बुंदेलखंड को IIT की सौगात
प्रयागराज में औद्योगिक नोड
जेवर एयरपोर्ट के पास सेमीकंडक्टर पार्क
लखनऊ में AI सिटी
गंगा एक्सप्रेसवे विस्तार के लिए ₹22,500 करोड़
लखनऊ, कानपुर और आगरा मेट्रो के लिए ₹32,075 करोड़
सरकार का दावा है कि इससे निवेश बढ़ेगा और रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ: “आशा और आकांक्षाओं का प्रतीक बजट”
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजट की सराहना करते हुए कहा—
“यह बजट आशा और आकांक्षाओं का प्रतीक है। नए भारत और विकसित भारत की संकल्पना इसमें स्पष्ट दिखाई देती है। आयुष और स्वास्थ्य पर जोर, महिलाओं के लिए छात्रावास और युवाओं के लिए अवसर—यह बजट अर्थव्यवस्था को तेज़ी से आगे बढ़ाने में मददगार साबित होगा।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: “हर घर में लक्ष्मी जी पधारें, यही प्रयास”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट 2026 को ऐतिहासिक बताते हुए कहा—
“कोशिश यही है कि हर घर में लक्ष्मी जी पधारें। यह बजट नारी शक्ति और युवा सोच का सशक्त प्रतिबिंब है।”
प्रधानमंत्री ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लगातार नौवीं बार बजट पेश करने की सराहना करते हुए कहा कि यह बजट आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत की मजबूत नींव रखता है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह: “सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को मजबूती”
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए ₹7.85 लाख करोड़ के आवंटन का स्वागत करते हुए कहा
“यह आवंटन सुरक्षा, विकास और आत्मनिर्भरता के बीच संतुलन को मजबूत करता है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को यह बजट नई गति देगा।”
गरीबी के आंकड़ों पर उठते सवाल
बजट भाषण में वित्त मंत्री ने दावा किया कि 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं।
हालांकि, गरीबी की परिभाषा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सरकारी मानक के अनुसार—
शहरी क्षेत्र: ₹1,944 प्रति माह
ग्रामीण क्षेत्र: ₹1,632 प्रति माह
से अधिक आय वाला व्यक्ति गरीब नहीं माना जाता।
आलोचकों का कहना है कि इतनी कम आमदनी में जीवन यापन करने वाला व्यक्ति भी वास्तविकता में गरीब है, लेकिन सरकारी आंकड़ों में उसे गरीब नहीं माना जा रहा।
रालोद नेता रोहित अग्रवाल: “विकसित भारत 2047 की दिशा में मजबूत कदम”
राष्ट्रीय लोक दल के प्रदेश अध्यक्ष (व्यापार) रोहित अग्रवाल ने बजट को दूरदर्शी बताते हुए कहा कि यह रोजगार, विनिर्माण, सेमीकंडक्टर मिशन, MSME और आत्मनिर्भर भारत को मजबूती देता है।
व्यापारियों का असंतोष: “व्यापारियों के लिए शुष्क बजट”
उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष संजय गुप्ता ने कहा कि बजट में परंपरागत व्यापारियों, ई-कॉमर्स नीति और स्वास्थ्य बीमा जैसे मुद्दों की अनदेखी हुई है।
कर्मचारियों की नाराज़गी: “वेतन आयोग और पेंशन पर चुप्पी”
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे.एन. तिवारी ने कहा कि—
8वें वेतन आयोग के लिए कोई प्रावधान नहीं
पेंशन सुधारों पर चुप्पी
टैक्स राहत नहीं
महिला कर्मचारी प्रतिनिधियों ने भी बजट से निराशा जताई।
EPS-95 पेंशनरों का आक्रोश
EPS-95 पेंशनरों ने न्यूनतम पेंशन बढ़ोतरी न होने पर नाराज़गी जताते हुए दिल्ली में आंदोलन की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि औसतन ₹1171 मासिक पेंशन में जीवन यापन असंभव है।
अखिलेश यादव और राहुल गांधी: बजट 2026
राहुल गांधी का तीखा हमला
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय बजट 2026 को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह बजट “कुछ चुनिंदा पूंजीपतियों के लिए राहत का दस्तावेज़ है, जबकि देश का आम आदमी, गरीब, किसान और नौकरीपेशा वर्ग पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया गया है।”
राहुल गांधी ने बजट में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि “अगर शहरी इलाके में ₹1,944 और ग्रामीण इलाके में ₹1,632 महीना कमाने वाला व्यक्ति गरीब नहीं माना जाएगा, तो फिर देश में गरीब आखिर है कौन?”
उन्होंने कहा कि महंगाई, बेरोज़गारी और गिरती आमदनी से जूझ रहे युवाओं के लिए बजट में कोई ठोस रोडमैप नहीं है। न तो सरकारी नौकरियों की बात की गई, न ही शिक्षा और स्वास्थ्य पर ज़मीन पर असर डालने वाले फैसले लिए गए।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार “आंकड़ों से विकास दिखा रही है, जबकि हकीकत में देश का बड़ा वर्ग आर्थिक असुरक्षा में जी रहा है।”
अखिलेश यादव–जनविरोधी बजट
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्रीय बजट 2026 को “जनविरोधी और ज़मीनी हकीकत से दूर” करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह बजट किसानों, युवाओं, महिलाओं और पिछड़े वर्गों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता।
अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार एक तरफ विकसित भारत की बात कर रही है, लेकिन दूसरी तरफ बेरोज़गार युवाओं के लिए न कोई ठोस योजना है और न ही स्थायी रोजगार के अवसर। “किसानों की आय दोगुनी करने का वादा फिर दोहराया गया, लेकिन उसे हासिल करने का रास्ता बजट में कहीं नहीं दिखता,” उन्होंने कहा।
उन्होंने उत्तर प्रदेश के संदर्भ में कहा कि बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स के ऐलान तो किए गए हैं, लेकिन राज्य के आम नागरिक को इससे क्या और कब फायदा मिलेगा, इस पर बजट पूरी तरह मौन है।
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि “यह बजट कॉरपोरेट हितों को ध्यान में रखकर बनाया गया है, न कि गांव, खेत और नौकरी की तलाश में भटकते युवाओं को ध्यान में रखकर।”
विकास का बजट या आंकड़ों का खेल?
केंद्रीय बजट 2026 को लेकर तस्वीर साफ है—
सरकार इसे ऐतिहासिक और भविष्यगामी बता रही है,
विपक्ष इसे आम आदमी से दूर मान रहा है,
जबकि कर्मचारी, पेंशनर और व्यापारी वर्ग असंतोष जता रहा है।
अब असली सवाल यही है—
क्या बजट की घोषणाएं ज़मीन पर उतरेंगी या बहस बयानों तक सीमित रह जाएगी?
बजट 2026 सच या दिखावा? गरीब कौन ? नौकरी किसे ? पेंशन कब ? बजट अमीर का या गरीब का !
जवाब खुद से मांगे और मिले तो अपनी राय से हमें भी अवगत कराए।




